तारे जमीन पर के बाद आमिर खान का धमाका: जानिए कैसी होगी 'सितारे जमीन पर' की कहानी!
Published by: Radio Hindustaan Team
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में हर कोई किसी न किसी मानसिक तनाव से गुजर रहा है। ऐसे में संगीत (Music) हमारे जीवन में एक संजीवनी बूटी की तरह काम करता है। आइए जानते हैं कि रोज़ाना थोड़ा समय निकालकर अपने पसंदीदा ऑनलाइन एफएम रेडियो पर संगीत सुनने के क्या-क्या फायदे हैं:
म्यूजिक थेरेपी आज के समय में बहुत लोकप्रिय हो रही है। जब आप अपनी पसंद के धीमे और मधुर गाने सुनते हैं, तो आपके दिमाग में 'डोपामाइन' (खुशी का हार्मोन) रिलीज होता है, जिससे तनाव का स्तर तुरंत गिर जाता है।
यदि आप पढ़ाई कर रहे हैं या ऑफिस का कोई ज़रूरी काम कर रहे हैं, तो बैकग्राउंड में धीमा इंस्ट्रूमेंटल (Instrumental) संगीत चलाने से ध्यान भटकना बंद हो जाता है।
अगर आपको रात में देर तक नींद नहीं आने की बीमारी है, तो सोते समय शांत और रिलैक्सिंग म्यूजिक सुनें। यह मांसपेशियों को आराम देकर गहरी नींद लाता है।
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भारतीय सिनेमा और संगीत का इतिहास बेहद खूबसूरत रहा है। आज के डिजिटल दौर में भले ही रोज़ाना सैकड़ों नए रीमिक्स गाने रिलीज होते हैं, लेकिन जो सुकून और जादू 90 के दशक (90s Retro Era) के गानों में था, उसकी तुलना किसी से नहीं की जा सकती। मोहम्मद रफ़ी, किशोर कुमार, लता मंगेशकर से लेकर अलका याग्निक, कुमार सानू और उदित नारायण की आवाज़ ने उस दौर को अमर बना दिया।
90 के दशक के गानों की सबसे बड़ी खासियत उनके सीधे और दिल को छू लेने वाले बोल होते थे। आनंद बख्शी, समीर और मजरूह सुल्तानपुरी जैसे महान गीतकारों ने ऐसे शब्द लिखे जो सीधे इंसानी जज्बातों से जुड़ते थे। उन गानों में शोर नहीं, बल्कि एक ठहराव और मेलोडी होती थी जो कानों को सुकून देती थी।
चाहे कॉलेज के दिनों का पहला प्यार हो, दोस्तों के साथ बिताए पल हों या फिर दिल टूटने का गम—उस दौर के संगीत में हर भावना के लिए एक मुकम्मल गाना मौजूद है। 'तुझे देखा तो ये जाना सनम', 'धीरे-धीरे से मेरी जिंदगी में आना' और 'दिल है कि मानता नहीं' जैसे गाने आज भी हर उम्र के लोग गुनगुनाते हैं।
यदि आप भी आज के शोर-शराबे वाले संगीत से थक चुके हैं और वही पुराना सुकून वापस पाना चाहते हैं, तो हमारे ऑनलाइन एफएम रेडियो स्टेशन पर बने रहें। हम आपके लिए चुन-चुनकर 90 के दशक के वो बेहतरीन नगमे लेकर आते हैं जो आपकी पुरानी यादों को ताज़ा कर देंगे।
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भारतीय संगीत जगत में कई महान गायक आए और गए, लेकिन किशोर कुमार (Kishore Kumar) जैसा हरफनमौला कलाकार न कोई हुआ है और न कभी होगा। वे सिर्फ एक बेहतरीन गायक ही नहीं, बल्कि एक शानदार अभिनेता, संगीतकार, गीतकार और निर्देशक भी थे। उनकी आवाज़ में वो जादू था जो खुशी में झूमने पर मजबूर कर देता था और गम में आँखों को नम कर देता था।
किशोर कुमार का जन्म 4 अगस्त 1929 को मध्य प्रदेश के खंडवा में हुआ था और उनका असली नाम आभास कुमार गांगुली था। उनके बड़े भाई अशोक कुमार बॉलीवुड के बहुत बड़े अभिनेता थे। किशोर दा ने बिना किसी शास्त्रीय संगीत (Classical Music) की औपचारिक शिक्षा के अपने अनोखे अंदाज और 'योडलिंग' (Yodeling) के दम पर संगीत की दुनिया में अपनी एक अलग पहचान बनाई।
किशोर कुमार की सबसे बड़ी खासियत यह थी कि वे हर मिजाज के गाने गा सकते थे। जहाँ एक तरफ उन्होंने 'रूप तेरा मस्ताना' और 'इना मीना डीका' जैसे ऊर्जावान गाने गाए, वहीं दूसरी तरफ 'chingari koi bhadke' और 'आने वाला पल जाने वाला है' जैसे गहरे और संजीदा गानों को अपनी आवाज़ से अमर कर दिया। राजेश खन्ना और अमिताभ बच्चन की कामयाबी के पीछे किशोर दा के गानों का बहुत बड़ा हाथ था।
किशोर कुमार आज भले ही हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी जादुई आवाज़ आज भी हमारे सुख-दुख की साथी है। हमारे ऑनलाइन एफएम रेडियो स्टेशन पर हम रोज़ाना किशोर दा के गाए हुए वो चुनिंदा और सदाबहार नगमे आपके लिए लेकर आते हैं, जो सीधे रूह को छू जाते हैं। रेडियो हिंदुस्तान से जुड़े रहें और संगीत के इस सुनहरे दौर का आनंद लेते रहें।
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