मृत्यु के देवता और एक बालक का संवाद: नचिकेता और यमराज की अद्भुत ज्ञानवर्धक कथा
मृत्यु के देवता और एक बालक का संवाद: नचिकेता और यमराज की अमर कथा यह कहानी कठोपनिषद (Krishna Yajurveda) से ली गई है, जो जीवन, मृत्यु और आत्मा के रहस्यों को सुलझाती है। हज़ारों साल पहले, महर्षि वाजश्रवा (जिन्हें उद्दालक भी कहा जाता है) ने 'विश्वजीत यज्ञ' का आयोजन किया। इस यज्ञ का नियम था कि यज्ञ करने वाले को अपनी सबसे प्रिय और मूल्यवान वस्तुएं दान करनी होती थीं। वाजश्रवा का एक युवा पुत्र था, जिसका नाम नचिकेता था। नचिकेता बहुत ही बुद्धिमान, विचारशील और शुद्ध हृदय का बालक था। उसने देखा कि उसके पिता दान में ऐसी गायें दे रहे हैं जो बूढ़ी हो चुकी हैं, जो न दूध दे सकती हैं, न पानी पी सकती हैं और न ही घास खा सकती हैं। नचिकेता को चिंता हुई। उसने सोचा कि ऐसी अनुपयोगी वस्तुओं का दान करने से उसके पिता को पुण्य की जगह पाप लगेगा। अपने पिता को इस अनर्थ से बचाने के लिए, वह अपने पिता के पास गया और अत्यंत विनम्रता से पूछा: "पिताजी! आप अपनी सबसे प्रिय वस्तुएं दान कर रहे हैं। मैं भी तो आपकी संतान हूँ, आपका प्रिय हूँ। आप मुझे किसे दान में देंगे?...